रामायण सम्बंधित श्रीलंका के स्थलों की एक रोमांचक यात्रा कथा लाग – १

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रामायण सम्बंधित श्रीलंका के स्थलों की एक रोमांचक यात्रा कथा लाग – १

एक इंसान अपने जीवनकाल में क्या अर्जित करने का स्वप्न देखता है? ज्ञान, धन, ख़ुशी या प्रेम? परन्तु यह मेरा स्वप्न नहीं था। मेरा स्वप्न था विश्वास, आस्था और श्रद्धा अर्जित करना। कुछ, जो मैंने खो दिया था और उसे फिर पाने हेतु अतिउत्सुक था। इसी उद्देश्य से मैंने महाकाव्य रामायण में दर्शाए गए भगवान् हनुमान की श्रीलंका की ३०००कि.मी. की अजरामर यात्रा का अनुभव करने का निश्चय किया। इसके अंतर्गत दक्षिण भारत में हम्पी से कन्याकुमारी तक १२००कि.मी. की यात्रा पैदल चल कर पूर्ण की। इसके उपरांत श्रीलंका की परिधी, करीब २०००कि.मी., मोटरसाइकल द्वारा पूर्ण की। और श्रीलंका स्थित रामायण सम्बंधित कई स्थलों के दर्शन किये।

मंदिर, गुफाएं, बगीचे, पर्वत और विरासती स्थल, ऐसे करीब ४० छोटे बड़े रामायण सम्बंधित स्थल हैं जो पूरे श्रीलंका में फैले हुए हैं। इनमें से ज्यादातर स्थलों के दर्शन सुलभ हैं। कुछ स्थल ऐसे भी हैं जिन्हें नक़्शो व विस्तृत दिशानिर्देशों के बावजूद भी ढूँढना व वहां तक पहुँचना अत्यंत कठिन है। श्रीलंका में कई यात्रा संस्थाएं हैं जो रामायण सम्बंधित श्रीलंका के प्रमुख स्थलों के दर्शन करातीं हैं। परन्तु यदि आप श्रीलंका स्थित रामायण सम्बंधित प्रमुख व अप्रचलित, सभी स्थलों के दर्शन करना चाहें तब व्यवस्था आपको स्वयं ही करनी पड़ेगी।

श्रीलंका स्थित रामायण सम्बंधित दर्शनीय स्थल

श्रीलंका के शिव मंदिर

श्रीलंका में पहला वह रामायण सम्बंधित स्थल, जिसके दर्शन का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ, वह था चिलाव के समीप स्थित मुन्नेश्वरम मंदिर। श्रीलंका में रामायण सम्बंधित कुल ३ शिव मंदिर हैं जो एक कथा द्वारा जुड़े हैं। युद्ध जीतने के उपरांत भगवान राम ने अयोध्या वापसी की यात्रा आरम्भ की। पर, रावण वध के उपरांत उन्हें ब्राम्हण हत्या का दोष भी प्राप्त हुआ था। मुन्नेश्वरम में भगवान् राम को अपने इस दोष के कम होने की अनुभूति हुई और उन्होंने इस दोष से मुक्ति हेतु भगवान् शिव की आराधना की। भगवान् शिव ने उन्हें मनावरी, तिरुकोनेश्वरम, तिरुकेतीश्वरम और रामेश्वरम, इन ४ स्थलों में शिवलिंगों की स्थापना कर, दोष निवारण हेतु इनकी आराधना करने का मार्ग सुझाया।

चिलाव का मुन्नेश्वरम मंदिर

रामायण सम्बंधित श्रीलंका के स्थलों की एक रोमांचक यात्रा कथा लाग – १

मुन्नेश्वरम मंदिर परिसर में कई छोटे मंदिर स्थित हैं जिनमें मुख्य मंदिर भगवान् शिव को समर्पित है। मेरी यात्रा के दौरान वहां उत्सव का वातावरण था। सम्पूर्ण मंदिर पुष्प द्वारा अलंकृत था व दीयों और रोशनी के प्रकाश में जगमगाता अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहा था। पूरा मंदिर दर्शनार्थियों द्वारा खचाखच भरा हुआ था फिर भी कहीं धक्कामुक्की व हडबडाहट नहीं थी। मेरे अस्तव्यस्त भेष के बावजूद लोग मुस्कुराकर मेरा स्वागत कर रहे थे।

मनावरी शिवम् कोविल, चिलाव

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तमिल भाषा में मंदिर को कोविल कहा जाता है। मनावरी सिवम कोविल या ईस्वरण कोविल एक छोटा परन्तु धार्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मंदिर है। ब्राम्हण हत्या दोष निवारण हेतु भगवान् राम द्वारा स्थापित यह पहला शिवलिंग है। चूंकि इस शिवलिंग की स्थापना स्वयं भगवान् राम ने की थी, इसे रामलिंगम भी कहा जाता है। जैसा कि माना जाता है, भगवान् राम का जन्म ५११४ ई.पू. में हुआ था। इसका तात्पर्य है कि यह शिवलिंग ७०००वर्षों से भी अधिक प्राचीन है।

रामसेतु

रामायण सम्बंधित श्रीलंका के स्थलों की एक रोमांचक यात्रा कथा लाग – १

इसके उपरांत मैं तलईमन्नार की तरफ रवाना हो गया जो भौगोलिक रूप से भारत से निकटतम स्थान है और रामसेतु का भारत की तरफ का छोर है। इसे ऐडम सेतु भी कहा जाता है। किवदंतियां कहतीं हैं कि, भगवान हनुमान द्वारा लंका में देवी सीता को खोजने के उपरांत, वानर सेना ने लंका की तरफ कूच किया व समुद्र तट तक पहुँच गए परन्तु लंका तक पहुँचने का कोई साधन नहीं था। उस क्षण लंका पहुँचने हेतु वानर वास्तुकार नल ने समुद्रतट से लंका तक सेतु निर्माण की योजना तैयार की। कहा जाता है कि सेतु निर्माण के दौरान पत्थर समुद्र में डूब रहे थे। तब वानर सेना ने पत्थरों पर भगवान् राम का नाम लिख कर उन पत्थरों द्वारा इस राम सेतु का निर्माण किया। इस सेतु निर्माण में उपयोग में लाये गए कुछ तैरते पत्थर हम रामेश्वरम के पंचमुखी हनुमान मंदिर में देख सकते हैं।

तलैमन्नार में स्थित पुराने प्रकाश स्तम्भ के समीप तट से श्रीलंका नौदल नौकासेवा उपलब्ध कराती है जो इस सेतु के दर्शन हेतु अति उपयुक्त है। जहाँ समुद्र का स्तर उथला है वहां इस सेतु के अवशेष अभी भी देखे जा सकते हैं।

राम सेतु के दर्शन उपरांत मैं रात के भोजन हेतु शहर की तरफ मुडा। मैंने एक छोटे भोजनालय में प्रवेश किया और उसके मालिक से तिरुकेतीश्वरम के मार्ग से सम्बंधित जानकारी हासिल की। जैसे ही उन्हें मेरे भारतीय होने व मेरी इस यात्रा के प्रयोजन के बारे में ज्ञात हुआ, उन्होंने भोजनालय में उपस्थित सभी ग्राहकों को बताया। शीघ्र ही सब मेरी मेज के चारों ओर एकत्र हो गए व क्रिकेट, राजनीति, भ्रष्टाचार व धार्मिक स्थलों पर चर्चा करने लगे। सारे अपरिचित पास आ कर मुझसे हस्तांदोलन करने लगे और मुस्कुराते हुए मेरा अभिनन्दन किया व मेरी यात्रा हेतु मुझे शुभकामनाएं दीं। यह सब कुछ मेरे लिए अद्भुत था। इतने सारे लोग मेरी यात्रा से रोमांचित थे। उन्होंने मुझ पर सलाहों और सहायताओं की बौछार कर दी।

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