रामायण सम्बंधित श्रीलंका के स्थलों की एक रोमांचक यात्रा कथा लाग – ३

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लायन रॉक अर्थात् शेर शिला

सिगिरिया का अर्थ है शेर रुपी शिला अर्थात् लायन रॉक। यह प्राचीन श्रीलंका की राजधानी थी। अपने आप में अनोखी यह अन्य शिलाओं से घिरी, १८०मी. ऊंची विशाल शिला पर स्थित है। राजधानी के रूप में इसकी स्थापना राजा कश्यप के शासनकाल में हुआ था जब उसने अपने पिता को मार कर, इस राज्य के असली उत्तराधिकारी, अपने भ्राता मोगल्लाना से इसे छीना था। कश्यप ने इसकी संरचना रक्षात्मक किला व आमोद महल के रूप में की थी। विडम्बना देखिये, कुछ समय पश्चात, इस किले में ही कश्यप अपने भाई मगल्लाना से युद्ध में पराजित हो गया। तत्पश्चात इसे सन्यासियों के हवाले कर दिया गया और इस तरह इसके निर्माण के दोनों उद्देश्य असफल हो गए।

चूंकि सिगिरिया एक गढ़ था, उसमें सभी अनिवार्य रक्षात्मक संरचनाएं उपस्थित थीं जैसे प्राचीर, स्तंभ, मुख्य द्वार और खन्दक जिसमें किसी समय मगरमच्छ रखे गए थे। इनका उद्देश्य गुप्तचरों, शत्रुओं व गद्दारों से गढ़ के रहवासियों की रक्षा करना था। गढ़ के प्राचीर के भीतर, सिगिरिया शिला तक के मार्ग पर पानी, शिलाखण्ड और मेंड़ बगीचे बनाए गए थे।

दर्पण दीवार

पहाड़ी के आधे रस्ते पर एक दर्पण भित्त थी, अर्थात् पलस्तर दीवार जो किसी समय इतनी ज्यादा चमकदार थी कि यह कश्यप के लिए दर्पण का कार्य करती थी। इस दर्पण के पर्यटकों ने इतने दर्शन किये, इन पर अंकित प्राचीन भित्तिचित्रण इसको प्रमाणित करतें हैं। परन्तु समय के साथ साथ, कला के साथ अपवित्रता और अश्लीलता जुड़ने लगी और उसका एक अभिन्न अंग बनने लगी। आश्चर्य होता है कि “राजू रानी से प्रेम करता है”, मेरा बाप चोर है” या “इधर पेशाब करना मना है” जैसे प्रचारवाक्य जो इन पर्यटन स्थलों पर लिखे जातें हैं, भविष्य में क्या यह भी हमारे विरासत का हिस्सा माने जायेंगे?

भक्त हनुमान, राम्बोड़ा

रामायण सम्बंधित श्रीलंका के स्थलों की एक रोमांचक यात्रा कथा लाग – ३

भक्त हनुमान मंदिर, कैंडी से ५०कि.मी. दूर, राम्बोड़ा के पास नुवारा एलिया के रास्ते पर स्थित है। ऐसा मानना है कि भक्त हनुमान देवी सीता को खोजने यहाँ भी आये थे। यहाँ समीप ही सीता अश्रु कुण्ड है जो दंतकथाओं के अनुसार सीता देवी के अश्रुओं से बना है। यह वही स्थान है जहां दोनों सेनायें पहली बार एक दूसरे के समक्ष आयीं थीं। राम्बोड़ा पहाड़ी की तरफ भगवान् राम की सेना व दूसरी तरफ की रावण सेना राम्बोड़ा झील के दोनों तरफ खड़ीं थीं।

एक अनुभव

राम्बोड़ा के भक्त हनुमान मंदिर की स्थापना चिन्मय मिशन ने एक पहाड़ी के ऊपर की थी जहाँ से राम्बोड़ा झील दिखाई देता है। इस मंदिर के पास ही मुझे इस यात्रा का अब तक का सबसे ज्यादा नागवार अनुभव प्राप्त हुआ। जब मैं अपनी मोटरसाईकल चला कर जा रहा था, मुझे राजमार्ग के बीचोंबीच एक कुत्ते का पिल्ला किसी इंतज़ार में बैठा दिखाई पड़ा। मैंने सड़क के बाजू में मोटरसायकल खड़ी कर उसे उठाया और सड़क के बाजू रखा। पास की दूकान से उसके लिए कुछ खाने का सामान खरीदा और जैसे ही मुडा,मैंने देखा की वह शैतान पिल्ला फिर सड़क के बीचोंबीच बैठ गया था। मैं एक बार फिर उसकी तरफ बढ़ा पर इस बार वह भाग गया। मैं भी उसके पीछे भागा परन्तु हड़बड़ी में एक ट्रक के नीचे आते आते बचा।

जब तक ट्रक मेरे सामने से गुज़रा, उन कुछ क्षणों में ही वह गायब हो गया। मैं डर गया था कि वह ट्रक के नीचे आ गया। परन्तु एक राहगीर ने इशारे से बताया कि वह पास के एक घर में घुस गया था। मुझे उस पर इतना गुस्सा आया कि शायद मेरे सामने होता तो अवश्य उसे सबक सिखाता।

एडम चोटी

रामायण सम्बंधित श्रीलंका के स्थलों की एक रोमांचक यात्रा कथा लाग – ३

अगले कुछ दिनों में मैंने कैंडी, पोलोन्नारुवा, दाम्बुला, एडम चोटी और कई दूसरे स्थलों के दर्शन किये। कहा जाता है कि एडम चोटी पर भगवान शिव के पदचिन्ह अंकित हैं। अंततः मैं नुवारा एलिया से करीब ३०की.मी. दूर होर्टन मैदानी राष्ट्रीय उद्यान पहुंचा जिसे पाताल लोक अथवा विश्व का अंतिम स्थल भी कहा जाता है। यह वही स्थान है जहाँ अहिरावण ने राम और लक्षमण को बंदी बना कर रखा था। अपने पंचमुखी रूप में भगवान हनुमान ने उन्हें बाद में मुक्त कराया था।

भगवान हनुमान ने अपने पंचमुखी रूप में राम और लक्षमण को अहिरावण से मुक्त कराया था।

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