कोयला क्षेत्र में कमर्शियल माइनिंग की इजाजत देगी सरकार, रक्षा उत्पादन में एफडीआई की सीमा अब 74 प्रतिशत

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राहत पैकेज- 4

कोयला क्षेत्र में कमर्शियल माइनिंग की इजाजत देगी सरकार, रक्षा उत्पादन में एफडीआई की सीमा अब 74 प्रतिशत

नई दिल्ली। नई दिल्ली। कोरोना काल के मुश्किल में आई अर्थव्यवस्था को पटरी पर वापस लाने के लिए मोदी सरकार ने शनिवार को एक बड़ा ऐलान किया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार ने कोयला क्षेत्र में अपनी मोनोपॉली को खत्म करेगी। साथ ही कमर्शियल माइनिंग की इजाजत दी जाएगी। इसके अलावा कोल माइनिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 50 हजार करोड़ रुपए देने की बात भी कही गई है। वहीं रक्षा उत्पादन क्षेत्र में एफडीआई की सीमा भी अब 74 प्रतिशत कर दी गई है। यह पहले 49 प्रतिशत थी

निर्मला सीतारमण ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि भारत दुनिया के तीन सबसे बड़े कोल भंडारण क्षमता वाले देशों में शामिल है। कोयला खदान की नीलामी के नियम आसान बनाएंगे।

50 नए कोयला ब्लॉक्स उपलब्ध करवाए जाएंगे। कोल माइनिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 50 हजार करोड़ रुपए दिए जाएंगे। पारदर्शी नीलामी के जरिए 500 माइनिंग ब्लॉक उपलब्ध करवाए जाएंगे। एल्युमिनियम इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए बॉक्साइट और कोल ब्लॉक्स का जॉइंट ऑक्शन किया जाएगा। मिनरल इंडेक्स बनाया जाएगा। स्टांप ड्यूटी में राहत दी जाएगी।

इससे पहले निर्मला सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन के बाद आज चौथा दिन है। पिछले दिनों में हमने कई ऐलान किए। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के जरिए लोगों को राहत दी गई। एमएसएमई, एनबीएफसी के लिए ऐलान किए। प्रधानमंत्री ने कहा था कि हमें आत्मनिर्भर होना चाहिए।आत्मनिर्भर का मतलब ये नहीं कि हम दुनिया से अलग हो जाएं। कई सेक्टर को पॉलिसी से जुड़ी गतिविधियों की जरूरत है।

डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर से लोगों को बहुत फायदा हुआ। जीएसटी, आईबीसी जैसे सुधारों से फायदा हुआ। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए कई कदम उठाए। सरकारी बैंकों से जुड़े सुधार किए। इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रकर के लिए भी कोशिश शुरू हो चुकी हैं। लैंड बैंक बनाने में तकनीक का इस्तेमाल करते हुए आगे बढ़ेंगे। भविष्य के लिए 5 लाख हेक्टेयर जमीन की मैपिंग की जाएगी।

आज 8 सेक्टर- कोयला, खनिज, रक्षा उत्पादन, एयर स्पेस मैनेजमेंट, एयरपोर्ट्स, मेंटेनेंस एंड ओवरहॉल, केंद्र शासित प्रदेशों में पावर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियां, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा पर बात होगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता लाने के लिए मेक इन इंडिया को बल देना जरूरी है। भारत ने इस दिशा में कई कदम उठाए हैं। हथियारों की लिस्ट को नोटिफाइ किया जाएगा और आयात पर बैन लगाया जाएगा। साल दर साल भारत में ही हथियारों का उत्पादन बढ़ाया जाएगा और जो पुर्जे आयात करने पड़ते हैं उनका भी उत्पादन देश में ही किया जाएगा। इसके लिए अलग से बजट दिया जाएगा।

इससे रक्षा आयात खर्च होगा और उन कंपनियों को लाभ होगा जो भारत में सेना के लिए हथियार बनाएंगी। ऑर्डिनेंस फैक्ट्री ऑर्गनाइजेशन को निगमीकृत किया जाएगा। वित्त मंत्री ने जोर दिया कि कामकाज में सुधार के लिए निगमीकृत किया जाएगा, निजीकरण नहीं किया जाएगा। इसे शेयर बाजार में सूचीबद्ध किया जाएगा। आम लोग इसके शेयर खरीद सकेंगे। रक्षा उत्पादन में एफडीआई सीमा को 49 पर्सेंट से बढ़ाकर 74 पर्सेंट किया जा रहा है।


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