धोनी के 16 सालों का क्रिकेट सफर, जानिए कैसा रहा

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क्रिकेट दुनिया में पहले मास्टर ब्लास्टर कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर को भगवान का दर्जा दिया गया। अब भारत के मास्टर माइंड खिलाड़ी धोनी को भी उनके बराबर या उनसे आगे माना जाता है।

क्रिकेट को ‘द जेंटलमैन’ गेम कहा जता है। सभी खेलों में क्रिकेट को सबसे ख़ास उसकी अनिश्चितता बनाती है। जिसमें पलक झपकते ही बाजी कब इस पाले से उस पाले में चली जाती हैं, इसका पता ही नहीं चलता है। ऐसे में इस खेल को चलाने वाले खिलाड़ी यानी कप्तान को मास्टर माइंड कहा जाता है। मैदान में मौजूद टीम के कप्तान के सामने कई तरह की चुनौतियां सामने आती है, जिसमें उसे अपने मानसिक और शारीरिक कौशल का बेजोड़ नमूना पेश करते हुए खुद को सबसे आगे रखना होता है। 

एक क्रिकेट कप्तान के अंदर विपरीत स्थिति में संयम, दबाव झेलने की क्षमता, मानसिक तौर पर मजबूती, सभी खिलाड़ियों से उनका सर्वश्रेष्ठ निकलवाने का दमखम, बहुत ही कम समय में तीव्र सटीक निर्णय लेने की क्षमता और इसके साथ ही खुद के प्रदर्शन को सबसे आगे रखना, ये सभी चीजें एक क्रिकेट कप्तान को मैदान में साक्षात् भगवान का दर्जा देती है जिसके मास्टर-माइंड दिमाग में पूरा गेम चल रहा होता है। उसे किस स्थिति में कौन सा दांव खेलना है, बिलकुल शतंरज के 64 खानों की तरह हर चाल में विरोधी से एक कदम आगे चलना होता है। यही कला उस खिलाड़ी आम इंसान से भगवान होने का दर्जा देती हैं।

धोनी के 16 सालों का क्रिकेट सफर, जानिए कैसा रहा

जैसा की क्रिकेट दुनिया में पहले मास्टर ब्लास्टर कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर को भगवान का दर्जा दिया गया। अब भारत के मास्टर माइंड खिलाड़ी धोनी को भी उनके बराबर या उनसे आगे माना जाता है। धोनी क्रिकेट में इस्तेमाल होने वाले साम, दंड और भेद की सारी कलाओं में सर्वगुणसंपन्न हैं। वह भारत के ऐसे खिलाड़ी है जिन्होंने वर्तमान में ना सिर्फ भारतीय क्रिकेट को बदला बल्कि विश्व क्रिकेट में उसे बादशाहत का दर्जा भी दिलवाया। इतना ही नहीं क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के विश्व कप जीत के सपने को भी धोनी ने अपनी कप्तानी में 2011 में पूरा किया। 1983 विश्व कप जीत के 28 साल बाद भारत ने महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में विश्व कप जीतकर पूरे विश्व क्रिकेट में अपने नाम का बिगुल बजा दिया। जिस विरासत को वर्तमान कप्तान कप्तान विराट कोहली बखूबी आगे लेकर जा रहे हैं।

2007 टी20 विश्वकप में धोनी ने मचाया धमाल   

भारतीय क्रिकेट ने कप्तान सौरव गांगुली के कार्यकाल में गौरवशाली प्रदर्शन किया मगर कीर्तिमान रचने में टीम इंडिया कामयाब नहीं हो पाई। इसके बाद राहुल द्रविड़ की कप्तानी में बिखरी टीम इंडिया विश्व कप 2007 में जब बांग्लादेश से हारकर वापस लौटी तो टीम इंडिया के सभी खिलाड़ियों को अपने-अपने घर के बाहर फैंस के गुस्से का जमकर सामना करना पड़ा, इस टीम में महेंद्र सिंह धोनी भी शामिल थे। लिहाजा उनके भी घर के बाहर पत्थरबाजी हुई। उसी समय के दौरान युवा खिलाड़ी रहे धोनी ने अपनी शांत छवि का बेजोड़ नमूना पेश कर दिया था। 

हालाँकि समय बीता और उसी साल आईसीसी ने टी20 विश्व कप 2007 का पहली बार शुभारम्भ किया। अब इस क्रिकेट के फटाफट फोर्मेट में टीम इंडिया के अनुभवी खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, और राहुल द्रविड़ ने जाने से इंकार कर दिया था। ऐसे में टीम इंडिया की बागडोर को सँभालने के लिए टीम मैनेजमेंट के पास तीन या चार खिलाड़ी थे, जिसमें वीरेंद्र सहवाग, युवराज सिंह और महेंद्र सिंह धोनी का नाम था। बीसीसीआई ने बड़ा फैसला लेते हुए धोनी को 2007 टी20 वर्ल्ड कप में जाने वाली टीम का कप्तान घोषित कर दिया। यहाँ से शुरू होता है धोनी का गोल्डन टच, या कहे तो एक ऐसे राजा की कहानी शुरू होती है कि वो जिस चीज़ को छू लेता है वो सोना बन जाती है। 

कुछ इसी तरह बदली महेंद्र सिंह धोनी के भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी बनने की किस्मत। 50-50 ओवर का विश्व कप हारने के बाद गुस्साए फैंस के बीच में धोनी ने टी-20 विश्वकप जीत की खुश्बू साउथ अफ्रीका से भारत तक फैला दी। चारों तरफ ढोल ताश में पूरा देश झूमने लगा। इस विश्व कप में ही सभी ने धोनी के हर दांव पेच देख लिए थे। यही से धोनी के नाम का सिक्का लगातार बुलंदियों को छूता चला गया जिसने उन्हें हिंदुस्तान का सबसे सफल कप्तान बना दिया। 

IPL का हुआ ‘शंखनाद’ 

2007 टी20 विश्व कप के बाद हिंदुस्तान में फटाफट क्रिकेट आईपीएल की नींव रखी गई और भारतीय समर में क्रिकेट की रंगारंग इंडियन प्रीमियर लीग का शंखनाद जोरो-शोरो पर हुआ। इस लीग में रांची के रहने वाले धोनी ने चेन्नई सुपर किंग्स टीम की कप्तानी संभाली। यहाँ भी धोनी की किस्मत जमकर चमकी और उन्होंने अपनी कप्तानी में चेन्नई को तीन बार आईपीएल खिताब जीतवाया। जिसके चलते पूर्व के हीरो धोनी ने दक्षिण भारत के लोगों के दिलों में अपनी ख़ास जगह बनाई। नीली आर्मी वाले धोनी जैसे ही चेन्नई की येलो जर्सी पहनते है वो फैंस के थाला बन जाते हैं। दक्षिण भारत में थाला की उपाधि (यानी भगवान के सामन) अभी तक सिर्फ रजनीकांत को दी थी। लेकिन अब धोनी भी चेन्नई के थाला हैं जो उनकी दिल-ओ-जान बने हुए हैं। 

दुनियाभर में प्रसिद्द धोनी ने ना सिर्फ भारतीय क्रिकेट बल्कि आईपीएल में भी अपना नाम कमाया। आईपीएल के साथ-साथ भारतीय क्रिकेट को दिन प्रति दिन लगातार बुलंदियों पर ले जाने की जिम्मेदारी धोनी ने अपने कंधो पर बखूबी उठाई। उन्होंने टीम इंडिया को ना सिर्फ टेस्ट और वनडे क्रिकेट में बादशाहत हासिल करवाई बल्कि आईसीसी के तीनो टूर्नामेंट 2007 टी20 विश्व कप, 2011 विश्व कप ख़िताब और 2013 चैम्पियंस ट्रॉफी जीताकर टीम इंडिया को एक अलग दर्जा दिलवाया। 

2004 में बांग्लादेश के खिलाफ क्रिकेट की दुनिया में पहला अन्तराष्ट्रीय मैच खेलने वाले धोनी को उनके करियर में सादगी के लिए भी जाना जाता है। 16 साल के अन्तराष्ट्रीय करियर में धोनी कभी किसी भी प्रकार के विवाद का हिस्सा नहीं बने। उनकी कप्तानी में खेलें सभी खिलाड़ी धोनी को भारत का सर्वश्रेष्ठ कप्तान मानते हैं। बल्कि पूरे भारत के फैंस उन्हें देवता स्वरूप मानते है।

धोनी के 16 सालों का क्रिकेट सफर, जानिए कैसा रहा

अब जब धोनी ने अंतराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया है तो उनको ना सिर्फ भारतीय बल्कि क्रिकेट दुनिया के सभी फैंस 22 गज की पट्टी पर हमेशा याद करेंगे। जिसमें विकटों के पीछे क्रिकेट जगत का सबसे बड़ा जेंटलमैन विकेट कीपिंग कर रहा होता था। जिसका दिमाग हमेशा एक कदम आगे चलता था। जो बल्लेबाजी और विकेटकीपिंग से ही नहीं बल्कि दिमाग से भी विरोधियों को चारो खाने चित्त करने की क्षमता रखता है। भारतीय क्रिकेट इतिहास में धोनी का नाम हमेशा सुनहरे अक्षरों से लिखा जाएगा। धोनी के लिए अंत में एक ही लाइन याद आती है। न भूतो न भविष्यति! ना भूतकाल में धोनी जैसा कोई रहा है और ना ही भविष्य में धोनी जैसा कोई होगा। वह बाहुबली देवता स्वरूप हमेशा क्रिकेट फैंस के दिलों में अमर रहेंगे।


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